ग्राम प्रधान के अधिकार और कर्तव्य: पंचायत राज अधिनियम क्या कहता है

ग्राम प्रधान के अधिकार और कर्तव्य: पंचायत राज अधिनियम क्या कहता है
सांकेतिक तस्वीर (AI द्वारा निर्मित) सांकेतिक तस्वीर (AI द्वारा निर्मित)

संक्षेप में

  • ग्राम प्रधान को गांव के मतदाता सीधे चुनते हैं।
  • प्रधान ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठकों की अध्यक्षता करता है।
  • संविधान की 11वीं अनुसूची में पंचायतों के 29 विषय हैं।
  • में कार्यकाल खत्म होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाया गया।

ग्राम प्रधान के अधिकार उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 और संविधान के भाग 9 से तय होते हैं। प्रधान ग्राम पंचायत का निर्वाचित प्रमुख होता है और गांव के विकास कार्यों की जिम्मेदारी उसी पर होती है। 2026 के पंचायत चुनाव से पहले यह समझना उपयोगी है कि प्रधान क्या कर सकता है और किसके प्रति जवाबदेह है।

प्रधान का चुनाव और कार्यकाल

ग्राम प्रधान को ग्राम सभा के सभी पंजीकृत मतदाता सीधे चुनते हैं। संविधान के अनुच्छेद 243F के अनुसार पंचायत चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष है। कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। प्रधान के पद भी SC, ST, OBC और महिलाओं के लिए चक्रानुक्रम (रोटेशन) से आरक्षित होते हैं।

ग्राम प्रधान के अधिकार और कर्तव्य

प्रधान ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठकें बुलाता है और उनकी अध्यक्षता करता है। अधिनियम के अनुसार ग्राम सभा की बैठक साल में दो बार होनी चाहिए, जिनमें पंचायत का बजट, विकास योजना और पिछले काम का हिसाब रखा जाता है।

  • ग्राम पंचायत की विकास योजना तैयार कराना और उसे लागू करवाना
  • ग्राम निधि का संचालन, सचिव के साथ मिलकर भुगतान को मंजूरी
  • सफाई, पेयजल, नाली, गलियों और सार्वजनिक संपत्ति की देखरेख
  • सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के चयन में ग्राम सभा की बैठक कराना
  • जन्म-मृत्यु पंजीकरण और परिवार रजिस्टर से जुड़े काम में सहयोग

ग्राम प्रधान के अधिकार का दायरा संविधान से भी जुड़ा है। संविधान की 11वीं अनुसूची में 29 विषय दिए गए हैं, जिन पर राज्य कानून बनाकर पंचायतों को अधिकार दे सकता है। इनमें कृषि, पेयजल, सड़क, प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबी उन्मूलन जैसे विषय शामिल हैं। कौन से अधिकार असल में पंचायत को मिलेंगे, यह राज्य सरकार तय करती है। अनुच्छेद 243G राज्य को पंचायतों को स्वशासन की संस्था के रूप में शक्तियां देने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 243E के अनुसार पंचायत का कार्यकाल पहली बैठक की तारीख से पांच वर्ष का होता है।

समितियां

उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत अपना काम समितियों के जरिए भी कर सकती है। इन समितियों में पंचायत के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। इससे ग्राम प्रधान के अधिकार पंचायत सदस्यों के साथ साझा होते हैं।

जवाबदेही

ग्राम प्रधान के अधिकार के साथ जवाबदेही भी तय है। ग्राम सभा की बैठक में आय-व्यय का हिसाब रखना होता है। पंचायत के खातों का ऑडिट होता है। वित्तीय अनियमितता या कर्तव्य में लापरवाही पर अधिनियम के तहत कार्रवाई और पद से हटाने तक का प्रावधान है। ऐसे मामलों में जांच के बाद जिला स्तर के अधिकारी कार्रवाई करते हैं।

2026 में प्रधानों की स्थिति

पिछली पंचायतों का कार्यकाल मई 2026 में खत्म हो गया। अदालत के समक्ष रखी गई जानकारी के अनुसार 25 मई 2026 को निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2026 में तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया है। पूरी स्थिति UP पंचायत चुनाव 2026 लेख में है। विभाग की जानकारी पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर है।

यह भी पढ़ें: त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था

स्रोत: उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947; भारत का संविधान, भाग 9 और 11वीं अनुसूची; पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश; इलाहाबाद हाईकोर्ट का अक्टूबर 2026 का आदेश।

स्रोत

  1. पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश

टैग: ,

Sudhanshu Tiwari

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी UP Election News (upelectionnews.com) के संस्थापक और संपादक हैं। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, राज्यसभा और उपचुनावों, चुनाव आयोग से जुड़ी खबरों और ओपिनियन पोल पर लिखते हैं। वेबसाइट पर क्या प्रकाशित होगा, इसका अंतिम फैसला और प्रकाशित खबरों की संपादकीय ज़िम्मेदारी उन्हीं की है। UP Election News का संचालन DB PR Solution करती है; जिन खबरों में DB PR Solution के किसी क्लाइंट या उसके अपने सर्वे का ज़िक्र होता है, उन पर अलग से खुलासा (डिस्क्लोज़र) दिया जाता है। किसी खबर में गलती दिखे तो info@upelectionnews.com पर लिखें।

इनकी सभी खबरें →
इस खबर में गलती दिखी? हमें बताएं
हम हर सूचना की जाँच करते हैं। Corrections Policy