त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था उत्तर प्रदेश के ग्रामीण शासन की नींव है। गांव के स्तर पर ग्राम पंचायत, विकास खंड (ब्लॉक) के स्तर पर क्षेत्र पंचायत और जिले के स्तर पर जिला पंचायत काम करती है। 2026 के पंचायत चुनाव इन्हीं तीनों स्तरों के लिए होने हैं। इस लेख में संविधान और राज्य के कानूनों के आधार पर इस व्यवस्था को समझाया गया है।
संवैधानिक आधार
1992 के 73वें संविधान संशोधन से संविधान में भाग 9 जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243 से 243O तक पंचायतों के प्रावधान हैं। यह संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ। अनुच्छेद 243B के अनुसार 20 लाख से अधिक आबादी वाले हर राज्य में गांव, मध्यवर्ती और जिला, तीनों स्तरों पर पंचायतें होंगी। इसी से त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था बनी।
अनुच्छेद 243D के तहत SC और ST के लिए आबादी के अनुपात में सीटें आरक्षित होती हैं। हर स्तर पर कम से कम एक तिहाई सीटें और अध्यक्ष के पद महिलाओं के लिए आरक्षित होते हैं। अनुच्छेद 243E पांच साल का कार्यकाल तय करता है और 243K के तहत राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराता है।
त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के तीन स्तर
ग्राम पंचायत
ग्राम पंचायत सबसे निचला स्तर है। इसके प्रमुख को ग्राम प्रधान कहा जाता है। प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड सदस्य) दोनों सीधे गांव के मतदाता चुनते हैं। ग्राम पंचायतें उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 के तहत काम करती हैं। ग्राम सभा में गांव के सभी पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं।
क्षेत्र पंचायत
क्षेत्र पंचायत विकास खंड के स्तर पर होती है। इसके सदस्य, जिन्हें आम तौर पर BDC (क्षेत्र पंचायत सदस्य) कहा जाता है, सीधे चुने जाते हैं। क्षेत्र पंचायत के प्रमुख, यानी ब्लॉक प्रमुख, का चुनाव ये निर्वाचित सदस्य करते हैं। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961 के तहत है।
जिला पंचायत
जिला पंचायत सबसे ऊपर का स्तर है। जिला पंचायत सदस्य सीधे चुने जाते हैं, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित सदस्य करते हैं। इसलिए ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव अप्रत्यक्ष होते हैं। जिला पंचायत भी 1961 के अधिनियम के तहत काम करती है।
एक मतदाता, चार वोट
त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में ग्रामीण मतदाता एक ही चुनाव में चार पदों के लिए वोट देता है: ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य। 2021 तक यूपी के पंचायत चुनाव मतपत्र से हुए। मतदान का तरीका राज्य निर्वाचन आयोग तय करता है।
शहरी इलाके, यानी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत, इस व्यवस्था में शामिल नहीं हैं। उनके चुनाव अलग से नगरीय निकाय चुनाव के रूप में होते हैं।
2026 के चुनाव से संबंध
त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था की सभी इकाइयों का कार्यकाल मई 2026 में खत्म हो चुका है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2026 में तीन महीने के भीतर चुनाव पूरे करने का निर्देश दिया है। पूरी स्थिति UP पंचायत चुनाव 2026 लेख में है। विभाग की जानकारी पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर है।
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स्रोत: भारत का संविधान, भाग 9 (अनुच्छेद 243 से 243O); उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947; उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961; पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश।


