खैर विधानसभा सीट अलीगढ़ जिले में है और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पिछले तीन चुनावों में यहां भाजपा जीती है। इनमें 2024 का उपचुनाव भी शामिल है। लेकिन सीट का लंबा इतिहास बताता है कि यहां कई दलों को मौका मिला है। यह लेख चुनाव आयोग के आंकड़ों पर आधारित है।
खैर विधानसभा सीट का शुरुआती इतिहास
1951 के पहले चुनाव में यह इलाका “खैर कम कोइल नॉर्थ वेस्ट” सीट का हिस्सा था, जहां कांग्रेस जीती थी। आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार 1962 में स्वतंत्र पार्टी ने यह सीट जीती। 1967 और 1974 में कांग्रेस जीती। 1969 में भारतीय क्रांति दल और 1977 में जनता पार्टी को जीत मिली। 1980 में कांग्रेस (इ) ने वापसी की।
1985 में लोकदल ने यह सीट जीती। 1989 और 1993 में जनता दल जीता। 1991 और 1996 में भाजपा जीती। 2002 में बसपा और 2007 में रालोद ने सीट जीती।
आरक्षित सीट बनने के बाद
2008 के परिसीमन के बाद 2012 से खैर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2012 में रालोद के भगवती प्रसाद 38,774 वोटों से जीते। 2017 में भाजपा के अनूप ने 1,24,198 वोट पाकर बसपा को 70,721 वोटों से हराया।
2022 का नतीजा
2022 में सपा और रालोद गठबंधन में थे, और खैर सीट रालोद के हिस्से आई थी।
2022 में अनूप प्रधान को 1,39,643 वोट मिले। यह कुल वैध वोटों का 55.55% था। बसपा की चारु कैन 65,302 वोट के साथ दूसरे और रालोद के भगवती प्रसाद 41,644 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। जीत का अंतर 74,341 वोट रहा। तब सीट पर 4,07,399 मतदाता थे और मतदान 61.7% हुआ।
खैर विधानसभा सीट पर 2024 का उपचुनाव
2024 में अनूप प्रधान हाथरस लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद खैर सीट खाली हुई। 20 नवंबर 2024 को उपचुनाव हुआ। इसमें पांच उम्मीदवार मैदान में थे। आयोग के आंकड़ों के अनुसार इनमें से तीन की जमानत जब्त हुई।
भाजपा के सुरेंद्र दिलेर को 1,00,181 वोट मिले। इस बार चारु कैन सपा की उम्मीदवार थीं और उन्हें 61,788 वोट मिले। जीत का अंतर 38,393 वोट रहा। मतदान करीब 46.1% रहा, जो 2022 से काफी कम था। सभी उपचुनावों का हाल यूपी उपचुनाव 2024 नतीजे लेख में है।
विश्लेषण: खैर विधानसभा सीट पर 2027 की तस्वीर
खैर विधानसभा सीट पर भाजपा ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की है। 2017 से 2022 के बीच भाजपा के वोट 1,24,198 से बढ़कर 1,39,643 हो गए। यानी करीब 15 हजार वोट की बढ़त हुई। 2022 में उसका वोट शेयर 50% से ऊपर था। लेकिन उपचुनाव में जीत का अंतर घटकर करीब आधा रह गया। तब मतदान भी कम था। 2022 में बसपा और रालोद के वोट मिलाकर करीब 1.07 लाख थे। अब रालोद भाजपा के साथ है। 2027 में विपक्ष का उम्मीदवार कौन होगा, इससे मुकाबले की दिशा तय होगी। 2022 का पूरा नतीजा यूपी चुनाव 2022 नतीजे लेख में है। आधिकारिक आंकड़े चुनाव आयोग की वेबसाइट पर हैं।
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स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की सांख्यिकीय रिपोर्टें (1962-2022) और नवंबर 2024 उपचुनाव का परिणाम।


