NOTA क्या है, यह सवाल हर चुनाव में उठता है। NOTA का पूरा नाम None of the Above है, यानी “इनमें से कोई नहीं”। EVM पर यह आखिरी बटन होता है। जो मतदाता किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देना चाहता, वह इसे दबा सकता है। इस लेख में नियम और यूपी के आधिकारिक आंकड़े दिए गए हैं।
NOTA क्या है और कब शुरू हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितंबर 2013 को PUCL बनाम भारत सरकार मामले में फैसला दिया। अदालत ने कहा कि मतदाता को सभी उम्मीदवारों को नकारने का अधिकार भी मिलना चाहिए और यह गोपनीय रहना चाहिए। इसके बाद चुनाव आयोग ने EVM और मतपत्र पर NOTA का विकल्प जोड़ा।
पहले भी मतदाता चुनाव नियम 1961 के नियम 49-O के तहत वोट न देने की बात दर्ज करा सकता था। लेकिन इसमें गोपनीयता नहीं रहती थी। NOTA ने यह कमी दूर की।
नतीजे पर असर
NOTA क्या है, इसके साथ यह जानना भी जरूरी है कि इसका नतीजे पर क्या असर होता है। चुनाव आयोग के नियम के अनुसार NOTA के वोट गिने जाते हैं और रिकॉर्ड में दर्ज होते हैं। लेकिन इनका नतीजे पर कोई कानूनी असर नहीं होता। अगर किसी सीट पर NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिलें, तब भी सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार ही जीतता है। NOTA के वोट जमानत राशि तय करने के लिए भी नहीं गिने जाते।
यूपी में NOTA के आंकड़े
2024 लोकसभा चुनाव
आयोग के आंकड़ों के अनुसार 2024 में यूपी की 80 सीटों पर कुल 6,36,855 वोट NOTA को मिले। यह कुल वैध वोटों का करीब 0.73% है। सबसे ज्यादा 19,032 NOTA वोट रॉबर्ट्सगंज (SC) सीट पर पड़े, जो वहां के वोटों का 1.92% था। झांसी में 15,302 और मिर्जापुर में 15,049 NOTA वोट पड़े। सबसे कम 2,891 NOTA वोट प्रतापगढ़ में पड़े।
डाक मतपत्र में भी NOTA का विकल्प होता है। 2024 में यूपी में 1,877 डाक वोट NOTA को गए। प्रदेश की 80 में से 11 सीटों पर NOTA का हिस्सा 1% या उससे ज्यादा रहा।
विधानसभा चुनाव
NOTA क्या है, यह मतदाताओं को कितना पता है, इसका अंदाजा विधानसभा चुनावों के आंकड़ों से भी मिलता है।
2017 के विधानसभा चुनाव में 7,57,643 मतदाताओं ने NOTA चुना। यह 0.87% था। 2022 में यह संख्या घटकर 6,37,313 रह गई, यानी 0.69%। 2022 में आम आदमी पार्टी को 3,47,187 और AIMIM को 4,50,929 वोट मिले। दोनों का आंकड़ा NOTA से कम रहा।
NOTA क्या है और क्यों जरूरी: विश्लेषण
यूपी में NOTA का हिस्सा एक प्रतिशत से कम रहा है। फिर भी करीबी मुकाबलों में यह अहम हो जाता है। 2022 में धामपुर सीट पर जीत का अंतर सिर्फ 203 वोट था, जबकि वहां 834 वोट NOTA को मिले। कुर्सी सीट पर अंतर 217 वोट था और NOTA को 1,723 वोट मिले। चांदपुर में अंतर 234 और NOTA 854 रहा। NOTA क्या है, यह समझना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह मतदाता की नाराजगी का आधिकारिक रिकॉर्ड बनता है। EVM के काम करने का तरीका EVM और VVPAT लेख में है।
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स्रोत: सुप्रीम कोर्ट, PUCL बनाम भारत सरकार (27 सितंबर 2013); भारत निर्वाचन आयोग, लोकसभा 2024 और उत्तर प्रदेश विधानसभा 2017 व 2022 की सांख्यिकीय रिपोर्टें। आंकड़े आयोग की वेबसाइट पर हैं।


