पंचायत चुनाव में आरक्षण हर बार सबसे ज्यादा चर्चा का विषय होता है। उम्मीदवार यह जानना चाहते हैं कि उनकी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी। यह फैसला संविधान, राज्य के पंचायत कानूनों और अदालत के फैसलों से तय होता है। इस लेख में यही नियम आसान भाषा में समझाए गए हैं।
संविधान क्या कहता है
संविधान का अनुच्छेद 243D पंचायतों में आरक्षण का आधार है। इसके अनुसार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सीटें उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षित होती हैं। यह अनुपात पंचायत क्षेत्र की कुल आबादी के हिसाब से निकलता है।
महिलाओं के लिए हर स्तर पर कम से कम एक-तिहाई सीटें आरक्षित होती हैं। इसमें SC और ST वर्ग की महिलाओं की सीटें भी शामिल हैं। प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे पदों पर भी यही नियम लागू होता है।
पंचायत चुनाव में आरक्षण: OBC का नियम
अनुच्छेद 243D राज्य को पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान करने की छूट देता है। उत्तर प्रदेश के पंचायत कानूनों में OBC के लिए 27% तक आरक्षण का प्रावधान है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार स्थानीय निकायों में OBC आरक्षण के लिए तिहरी जांच जरूरी है। पहले एक समर्पित आयोग पिछड़ेपन का अध्ययन करता है। फिर उसकी सिफारिश के अनुसार आरक्षण तय होता है। तीसरी शर्त यह है कि SC, ST और OBC का कुल आरक्षण 50% से ऊपर न जाए।
2026 की स्थिति
राज्य सरकार ने मई 2026 में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित किया। अक्टूबर 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में होंगे, जिसमें 27% OBC आरक्षण शामिल है। पूरा ब्योरा UP पंचायत चुनाव 2026 लेख में है।
चक्रानुक्रम यानी रोटेशन
पंचायत चुनाव में आरक्षण स्थायी नहीं होता। संविधान के अनुसार आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में चक्रानुक्रम से आवंटित होती हैं। इसका मतलब है कि जो सीट एक चुनाव में किसी वर्ग के लिए आरक्षित थी, वह अगली बार किसी और वर्ग में जा सकती है। रोटेशन का क्रम राज्य के नियमों से तय होता है।
आरक्षण सूची कैसे जारी होती है
पंचायत चुनाव में आरक्षण की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है।
- पहले जिला स्तर पर आरक्षित पदों की अनंतिम सूची जारी होती है।
- इस सूची पर लोगों से आपत्तियां मांगी जाती हैं।
- आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम सूची प्रकाशित होती है।
- इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करता है।
अंतिम सूची आने तक किसी सीट का आरक्षण पक्का नहीं माना जाता। इसलिए उम्मीदवारों को आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए। विभाग की जानकारी पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर मिलती है।
विश्लेषण: आरक्षण क्यों बनता है विवाद
पंचायत चुनाव में आरक्षण सीधे उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़ा है। रोटेशन बदलने से कई मौजूदा प्रधान अपनी सीट से नहीं लड़ पाते। OBC आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट की शर्त ने भी कई राज्यों में चुनाव टाले हैं। इसलिए पंचायत चुनाव में आरक्षण की अनंतिम सूची पर आपत्ति का मौका दिया जाता है।
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स्रोत: भारत का संविधान, अनुच्छेद 243D; उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947; उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961; इलाहाबाद हाईकोर्ट का अक्टूबर 2026 का आदेश।


