आदर्श आचार संहिता क्या है: कब लागू होती है और किन कामों पर रोक लगती है

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संक्षेप में

  • आदर्श आचार संहिता चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का समूह है।
  • यह चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से नतीजों तक लागू रहती है।
  • इस दौरान सरकार नई योजनाओं की घोषणा नहीं कर सकती।
  • शिकायत के लिए आयोग का cVIGIL ऐप है।

आदर्श आचार संहिता चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और सरकार के लिए तय नियमों का समूह है। इसे भारत निर्वाचन आयोग जारी करता है। इसका मकसद यह है कि चुनाव में सबको बराबर मौका मिले और सत्ता में बैठा दल सरकारी ताकत का फायदा न उठाए। 2027 के यूपी चुनाव से पहले यह समझना उपयोगी है कि ये नियम क्या हैं।

आदर्श आचार संहिता कब लागू होती है

चुनाव आयोग जिस दिन चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करता है, उसी समय से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। यह चुनाव प्रक्रिया पूरी होने, यानी नतीजे घोषित होने तक लागू रहती है। विधानसभा चुनाव में यह पूरे राज्य में लागू होती है। उपचुनाव में आम तौर पर यह उस क्षेत्र या जिले तक सीमित रहती है।

कानूनी स्थिति

आचार संहिता कोई अलग कानून नहीं है। यह राजनीतिक दलों की सहमति से बने दिशानिर्देश हैं, जिन्हें आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों से लागू कराता है। हालांकि इसके कई प्रावधान, जैसे रिश्वत, धमकी या धर्म के नाम पर वोट मांगना, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध भी हैं।

सरकार पर क्या रोक लगती है

  • नई योजनाओं, परियोजनाओं या वित्तीय अनुदान की घोषणा नहीं हो सकती।
  • सरकारी वाहन, विमान या कर्मचारियों का चुनाव प्रचार में इस्तेमाल नहीं हो सकता।
  • चुनाव से जुड़े अधिकारियों के तबादले आयोग की अनुमति के बिना नहीं होते।
  • सरकारी खर्च पर उपलब्धियों के विज्ञापन नहीं दिए जा सकते।

पहले से चल रहे काम जारी रह सकते हैं। आपदा जैसी स्थिति में राहत कार्य पर रोक नहीं होती।

दलों और उम्मीदवारों के लिए नियम

आदर्श आचार संहिता के तहत जाति या धर्म के आधार पर वोट मांगना मना है। धार्मिक स्थलों का प्रचार के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकता। दूसरे दलों की आलोचना नीतियों और कामकाज तक सीमित रहनी चाहिए, निजी जीवन पर नहीं। रैली और जुलूस के लिए स्थानीय प्रशासन की पहले से अनुमति जरूरी है।

मतदान खत्म होने से 48 घंटे पहले सार्वजनिक प्रचार बंद हो जाता है। यह रोक लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 से आती है। मतदान के दिन बूथ के आसपास प्रचार नहीं किया जा सकता।

शिकायत कैसे करें

आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत आयोग के cVIGIL ऐप से की जा सकती है। इसमें फोटो या वीडियो के साथ शिकायत दर्ज होती है। आयोग के अनुसार ऐसी शिकायत पर 100 मिनट के भीतर कार्रवाई का लक्ष्य रखा गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर में भी शिकायत दी जा सकती है। आयोग की जानकारी भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर है।

विश्लेषण: यूपी 2027 के लिए क्यों अहम

यूपी जैसे बड़े राज्य में चुनाव कई चरणों में होता है। इसलिए आदर्श आचार संहिता कई हफ्तों तक लागू रहती है। घोषणा के बाद नई योजनाएं शुरू नहीं हो सकतीं, इसलिए उससे पहले के सरकारी फैसलों पर सबकी नजर रहती है। आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर आयोग नोटिस जारी कर सकता है और प्रचार पर अस्थायी रोक भी लगा सकता है। यूपी चुनाव की पूरी प्रक्रिया यूपी विधानसभा चुनाव कैसे होता है लेख में है।

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स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, आदर्श आचार संहिता के दिशानिर्देश और cVIGIL की जानकारी; भारत का संविधान, अनुच्छेद 324; लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951, धारा 126।

स्रोत

  1. Election Commission of India: Model Code of Conduct

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Sudhanshu Tiwari

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी UP Election News (upelectionnews.com) के संस्थापक और संपादक हैं। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, राज्यसभा और उपचुनावों, चुनाव आयोग से जुड़ी खबरों और ओपिनियन पोल पर लिखते हैं। वेबसाइट पर क्या प्रकाशित होगा, इसका अंतिम फैसला और प्रकाशित खबरों की संपादकीय ज़िम्मेदारी उन्हीं की है। UP Election News का संचालन DB PR Solution करती है; जिन खबरों में DB PR Solution के किसी क्लाइंट या उसके अपने सर्वे का ज़िक्र होता है, उन पर अलग से खुलासा (डिस्क्लोज़र) दिया जाता है। किसी खबर में गलती दिखे तो info@upelectionnews.com पर लिखें।

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