चंद्रशेखर आजाद ने 2024 के लोकसभा चुनाव में नगीना (SC) सीट जीतकर सबको चौंकाया। वे आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख हैं। उन्होंने भाजपा के ओम कुमार को 1,51,473 वोटों से हराया। सपा और बसपा दोनों यहां बहुत पीछे रहे। यह लेख चुनाव आयोग के आंकड़ों पर आधारित है।
नगीना 2024 का नतीजा
चंद्रशेखर आजाद को 5,12,552 वोट मिले। यह कुल वैध वोटों का 51.46% था। भाजपा के ओम कुमार को 3,61,079 वोट (36.25%) मिले। सपा के मनोज कुमार 1,02,374 वोट (10.28%) के साथ तीसरे स्थान पर रहे। बसपा के सुरेंद्र पाल सिंह को सिर्फ 13,272 वोट (1.33%) मिले।
सीट पर 16,47,310 मतदाता थे और करीब 60.8% मतदान हुआ। कुल सात उम्मीदवार मैदान में थे। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार चुनाव के समय चंद्रशेखर आजाद की उम्र 36 वर्ष थी।
डाक मतपत्र
डाक मतपत्र में भाजपा आगे रही। ओम कुमार को 1,328 डाक वोट मिले, जबकि आजाद को 740। लेकिन EVM के वोटों में अंतर बहुत बड़ा था। NOTA को 5,307 वोट मिले।
2022 से 2024 तक का सफर
2022 विधानसभा चुनाव
2022 में चंद्रशेखर आजाद गोरखपुर शहर सीट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ लड़े थे। उन्हें 7,640 वोट (3.06%) मिले और वे चौथे स्थान पर रहे। उस सीट पर योगी आदित्यनाथ को 1,65,499 वोट (66.18%) मिले थे। सपा की सुभावती शुक्ला 62,109 वोट के साथ दूसरे और बसपा 8,023 वोट के साथ तीसरे स्थान पर थी। आयोग के आंकड़ों के अनुसार तब उनकी पार्टी 110 सीटों पर लड़ी थी। सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई थी। पार्टी को कुल 1,19,170 वोट मिले थे।
2024 लोकसभा चुनाव
2024 में पार्टी सिर्फ 4 सीटों पर लड़ी। कुल 6,02,739 वोट मिले, जो प्रदेश के कुल वोटों का 0.69% था। नगीना के बाद सबसे अच्छा प्रदर्शन डुमरियागंज में रहा, जहां पार्टी उम्मीदवार को 81,305 वोट (8.05%) मिले। सीतापुर में पार्टी को 6,734 और बलिया में 2,148 वोट मिले। छोटे दलों की तुलना छोटे दलों का वोट शेयर लेख में है।
नगीना सीट की विधानसभा तस्वीर
परिसीमन आदेश 2008 के अनुसार नगीना लोकसभा सीट में नजीबाबाद, नगीना (SC), धामपुर, नहटौर (SC) और नूरपुर विधानसभा क्षेत्र हैं। 2022 में इनमें से तीन सपा और दो भाजपा ने जीती थीं। धामपुर में भाजपा सिर्फ 203 और नहटौर में 258 वोटों से जीती थी। यानी 2022 में यह इलाका कड़े मुकाबले वाला था।
विश्लेषण: चंद्रशेखर आजाद और 2027
नगीना में चंद्रशेखर आजाद ने अकेले लड़ते हुए 50% से ज्यादा वोट पाए। इसी सीट पर बसपा का वोट 2% से भी कम रहा। इससे संकेत मिलता है कि इस इलाके में दलित वोट का एक बड़ा हिस्सा उनकी ओर गया। लेकिन बाकी तीन सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा। 2027 में उनकी पार्टी अकेले लड़ेगी या गठबंधन करेगी, इस पर कई सीटों का समीकरण निर्भर कर सकता है। बसपा के वोट पर मायावती और बसपा का घटता वोट लेख पढ़ें। आधिकारिक आंकड़े चुनाव आयोग की वेबसाइट पर हैं।
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स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, लोकसभा आम चुनाव 2024 और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 की सांख्यिकीय रिपोर्टें; परिसीमन आदेश 2008।


