डाक मतपत्र यानी पोस्टल बैलेट उन मतदाताओं के लिए है जो मतदान केंद्र तक नहीं जा सकते। चुनाव आयोग कुछ तय वर्गों को यह सुविधा देता है। इनमें बुजुर्ग, दिव्यांग, सेना के जवान और चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारी शामिल हैं। 2024 में पहली बार किसी लोकसभा चुनाव में घर से वोटिंग की सुविधा दी गई। यह लेख आयोग की आधिकारिक जानकारी पर आधारित है।
डाक मतपत्र किसे मिलता है
निर्वाचन संचालन नियम 1961 में डाक मतपत्र के प्रावधान हैं। मुख्य रूप से ये वर्ग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं:
- सर्विस मतदाता, जैसे सशस्त्र बलों के जवान
- चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारी
- 85 साल से ज्यादा उम्र के मतदाता
- 40% मानक दिव्यांगता वाले मतदाता
- आयोग द्वारा अधिसूचित आवश्यक सेवाओं के कुछ कर्मचारी
बुजुर्ग, दिव्यांग और आवश्यक सेवा वाले मतदाताओं को नियमों में “अनुपस्थित मतदाता” कहा गया है। उनके लिए नियम 27A के तहत व्यवस्था है।
कितने मतदाता पात्र
आयोग के अनुसार 2024 के लोकसभा चुनाव के समय देश में 85 साल से ज्यादा उम्र के 81 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत थे। 90 लाख से ज्यादा दिव्यांग मतदाता भी पंजीकृत थे। यानी करीब 1.7 करोड़ मतदाता घर से वोटिंग के पात्र थे। आयोग ने इसे समावेशी चुनाव की दिशा में बड़ा कदम बताया।
घर से वोटिंग की प्रक्रिया
फॉर्म 12D
PIB पर जारी आयोग की जानकारी के अनुसार पात्र मतदाता को चुनाव अधिसूचना के पांच दिन के भीतर फॉर्म 12D भरकर रिटर्निंग ऑफिसर को देना होता है। दिव्यांग मतदाता को दिव्यांगता प्रमाणपत्र साथ लगाना होता है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) यह फॉर्म मतदाता के घर से ले सकता है।
मतदान दल का दौरा
इसके बाद मतदान कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की टीम मतदाता के घर जाती है। मतदाता को पहले से दौरे की सूचना दी जाती है। वोट की गोपनीयता बनाए रखी जाती है। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है। उम्मीदवारों को ऐसे मतदाताओं की सूची दी जाती है और वे चाहें तो अपना प्रतिनिधि भेज सकते हैं।
यह सुविधा वैकल्पिक है। इसका मकसद यह है कि शारीरिक दिक्कत के कारण कोई मतदाता वोट से वंचित न रहे। पात्र मतदाता चाहे तो मतदान केंद्र जाकर भी वोट डाल सकता है। पूरी जानकारी PIB की प्रेस विज्ञप्ति में है।
डाक मतपत्र की गिनती
मतगणना के दिन डाक मतपत्रों की गिनती सबसे पहले शुरू होती है। आयोग के नतीजों में हर उम्मीदवार के EVM वोट और डाक वोट अलग दिखाए जाते हैं। उदाहरण के लिए 2024 में गोरखपुर सीट पर सपा उम्मीदवार को 1,520 और भाजपा उम्मीदवार को 1,322 डाक वोट मिले थे। कई सीटों पर डाक वोट और EVM वोट का रुझान अलग रहता है।
विश्लेषण: करीबी मुकाबले में अहम
डाक मतपत्र की संख्या कुल वोटों के मुकाबले कम होती है। लेकिन करीबी मुकाबलों में ये फैसले पर असर डाल सकते हैं। 2022 के यूपी चुनाव में कई सीटों पर जीत का अंतर 1,000 वोट से कम था। ऐसी सीटों की जानकारी यूपी की सबसे करीबी सीटें लेख में है। मतदाता सूची में नाम जांचने के लिए फॉर्म 6 लेख पढ़ें।
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स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग; PIB प्रेस विज्ञप्ति (12 अप्रैल 2024); निर्वाचन संचालन नियम 1961।
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